उत्तर प्रदेश में जमीन पैमाइश की नई क्रांति: अब ‘जी एन एस एस रोवर’ (GNSS Rover) से होगा सीमांकन, खत्म होगा जरीब और फीते का दौर

1000446123

उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद का बड़ा फैसला! अब यूपी में जमीन की पैमाइश जरीब के बजाय GNSS Rover तकनीक से होगी। जानें राजस्व संहिता धारा-24 के नए नियम, सीमांकन की समय सीमा और किसानों को होने वाले बड़े लाभ। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।”

उत्तर प्रदेश में जमीन पैमाइश की नई क्रांति: अब ‘जी एन एस एस रोवर’ (GNSS Rover) से होगा सीमांकन, खत्म होगा जरीब और फीते का दौर

उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े पैमाईश विवाद और पैमाइश (Demarcation) में होने वाली देरी दशकों से एक बड़ी समस्या रही है। अक्सर देखा जाता है कि लेखपाल और राजस्व टीम जब गांव में पैमाइश करने पहुंचती है, तो पुराने उपकरणों जैसे ‘जरीब’ (Looped Chain) और फिते से पैमाइश करती है।Up Land Demarcation New Rules जरीब और ‘फीते’ के कारण सटीकता (Accuracy) पर सवाल उठते हैं। लेकिन अब योगी सरकार और राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है।

राजस्व परिषद के नवीनतम आदेश (पत्र संख्या: 710/4-04एफ/2026) के अनुसार, अब प्रदेश में जमीनों की पैमाइश जी एन एस एस रोवर (Global Navigation Satellite System Rover) तकनीक के माध्यम से की जाएगी। इसमें जमीन की नाप में होने वाली गलतियों की गुंजाइश न के बराबर होगी।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह तकनीक क्या है, राजस्व संहिता के नियम क्या कहते हैं और इससे आम जनता व किसानों को क्या बड़े लाभ होने वाले हैं।

1- क्या है राजस्व परिषद का नया आदेश?

राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि भूमि के सीमांकन/पैमाइश कार्य में अब आधुनिक तकनीक का समावेश अनिवार्य है। शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि पारंपरिक तरीकों से की जाने वाली पैमाइश में न केवल अत्यधिक समय लगता है, बल्कि इसकी गुणवत्ता (Quality) पर भी अक्सर शिकायतें प्राप्त होती हैं।

विशेष रूप से आई जी आर एस (IGRS) और मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतों में एक बड़ा हिस्सा भूमि विवादों का होता है। इन्ही समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए अब GNSS Rover Land Survey UP जी एन एस एस रोवर का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इस उपकरण से जमीन पैमाइश बहुत सरल और शीघ्र हो जाएगी।

जी एन एस एस रोवर (GNSS Rover) क्या है और यह कैसे काम करता है?

जी एन एस एस का पूरा नाम ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ है। यह एक उच्च-परिशुद्धता (High-Precision) वाला उपकरण है जो अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों (Satellites) से सिग्नल प्राप्त करता है।

सटीकता: जहाँ जरीब या फीते से नापते समय इंसानी चूक या जमीन की ढलान के कारण कुछ इंच या फिट का अंतर आ सकता है, वहीं रोवर तकनीक मिलीमीटर (mm) तक की सटीकता देती है। चाहे खेत में मकान बना हो घर बना हो तालाब हो नदी हो इस मशीन से सब जगह शुद्ध पैमाइश की जा सकती है।

सामान्य GPS की सटीकता → 3–5 मीटर

GNSS Rover + RTK → 1–2 सेंटीमीटर

डिजिटल को-ऑर्डिनेट्स: यह मशीन जमीन के अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) को डिजिटल रूप में दर्ज करती है। इससे जमीन का एक ‘डिजिटल सिग्नेचर’ बन जाता है जिसे भविष्य में कभी भी बदला नहीं जा सकता।जमीन सीमांकन की प्रक्रिया, यदि किसी खेत की पैमाइश करते हैं पैमाइश करने के बाद खेत के चारों कोणों के कोऑर्डिनेटर किस को उपलब्ध करा दिए जाएंगे जिसका रिकॉर्ड किसान के पास रहेगा भविष्य में कभी भी उसकी मेड एक जगह से दूसरी जगह नहीं हो सकती ।किसान को-ऑर्डिनेट को देखकर वह अपनी स्थिति बता सकता है।

मैपिंग से जुड़ाव: इस मशीन से ली गई रीडिंग को सीधे डिजिटल मैप (नक्शे) पर अपलोड किया जा सकता है, जिससे कागजी नक्शे और मौके की स्थिति में कोई अंतर नहीं रहता। अभी तक पैमाइश करने के बाद इस दस्तावेजों में कोई आवश्यक संशोधन करना होता था तो उसे कागज पर रिपोर्ट बनाकर के तैयार किया जाता था लेकिन अब इस पर मैच के माध्यम से यदि जमीनी नशे में कुछ बदलाव करना होगा तो इस मशीन से नक्शे पर ऑनलाइन बदलाव किया जाएगा और उसे सुरक्षित भी कर दिया जाएगा।Sarkari Free Yojana UP Land Records.

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और कानूनी प्रावधान

इस नए बदलाव को कानूनी मजबूती देने के लिए राजस्व परिषद ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धाराओं का हवाला दिया है:

धारा-24: UP Revenue Code Section 24

यह धारा भूमि के सीमांकन (Boundary Dispute) से संबंधित है। इसके तहत प्रावधान है कि सीमांकन की पूरी कार्यवाही आवेदन की तारीख से तीन माह के भीतर अनिवार्य रूप से समाप्त की जानी चाहिए।

राजस्व संहिता नियमावली, 2016 (नियम-16 व 22): इन नियमों के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर प्रत्येक ग्राम के मानचित्र का अंकीकरण (Digitization) और सीमा का स्थिरीकरण कराए।

पारंपरिक पैमाइश बनाम रोवर तकनीक: मुख्य अंतर|

विशेषतापारंपरिक विधिआधुनिक विधि
जरीब/फीता) (GNSS Rover
सटीकताकम (मानवीय त्रुटि संभव) | अधिक (सैटेलाइट आधारित)
पारदर्शिताविवाद की संभावना अधिकपूर्णतः पारदर्शी और डिजिटल |
समयकई घंटे या दिनबहुत कम समय में संभव
अभिलेखकेवल कागजों पर दर्जऑनलाइन और मैप पर डिजिटल एंट्री |

किसानों और आम आदमी को होने वाले 5 बड़े लाभ

(i) मेढ़ और सीमा विवादों का स्थाई अंतगांवों में सबसे ज्यादा झगड़े ‘मेढ़’ काटने या पड़ोसी की जमीन दबाने को लेकर होते हैं। रोवर तकनीक से जमीन के पक्के डिजिटल पॉइंट फिक्स हो जाएंगे। अगर कोई मेढ़ हटा भी दे, तो मशीन के जरिए दोबारा वहीं पर पॉइंट लगाया जा सकेगा।

(ii) समयबद्ध निस्तारण (3 महीने की गारंटी)- अब लेखपाल यह बहाना नहीं बना पाएंगे कि “जरीब टूट गई है” या “साधन नहीं हैं”। डिजिटल रोवर से पैमाइश तेज होगी, जिससे धारा-24 के मुकदमों का निस्तारण निर्धारित 90 दिनों के भीतर हो सकेगा।

iii) पक्षपात की संभावना खत्म

अक्सर एक पक्ष आरोप लगाता है कि पैमाइश गलत की गई है या लेखपाल ने दूसरे पक्ष की मदद की है। मशीन के डेटा के साथ छेड़छाड़ करना नामुमकिन है, जिससे न्यायपूर्ण समाधान मिलेगा।

(iv) सरकारी योजनाओं में सुगमता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि या अन्य योजनाओं के लिए सटीक लैंड रिकॉर्ड होना जरूरी है। डिजिटल पैमाइश से भूलेख डेटा अपडेट होगा, जिससे किसानों को सरकारी लाभ मिलने में आसानी होगी।

(v) पारदर्शी रिपोर्टिंग

पैमाइश के बाद जो रिपोर्ट तैयार होगी, वह सीधे सरकारी पोर्टल से लिंक की जा सकेगी। इससे जमीन के मालिक को अपनी पैमाइश की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा भी मिल सकती है।

लेखपालों और राजस्व विभाग की नई जिम्मेदारी

इस तकनीक के आने से राजस्व विभाग के कार्य करने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आएगा। तकनीकी प्रशिक्षण: लेखपालों को अब इन मशीनों को चलाने और डेटा हैंडलिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा: यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्वामित्व योजना’ के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

निष्कर्ष:उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। जी एन एस एस रोवर के उपयोग से न केवल राजस्व विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को तहसील और कचहरी के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी। जमीन की पैमाइश अब केवल ‘अंदाजे’ का खेल नहीं, बल्कि ‘विज्ञान’ की सटीकता होगी।

Sarkarifreeyojana.com की राय: हम इस कदम का स्वागत करते हैं। यदि आप भी अपनी जमीन का सीमांकन करवाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी तहसील में धारा-24 के तहत आवेदन कर सकते हैं और इस नई तकनीक का लाभ उठा सकते हैं।

नोट :- अभी यह तकनीक प्रारंभिक चरण में हैं तो अभी इसमें व्यावहारिक समस्याएं आ सकती हैं लेकिन एक या दो साल में यह तकनीक पूर्ण रूप से काम करने लगेगी तो आप अपनी पेमेंट हेतु इस तकनीक का उपयोग एक से डेढ़ साल बाद करवाए तो अच्छा रहेगा।

How to apply for Varasat online / उत्तर प्रदेश में जमीन वरासत के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें ?

जमीन की पैमाइशकी नई तकनीक

Leave a Comment