Up land measurement by rover machine लेखपालों की नहीं चलेगी अब मनमानी

1000380360

Up land measurement by rover machine लेखपालों की नहीं चलेगी अब मनमानी

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूमि पैमाइश (Land Measurement) की व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों की विस्तृत (Detailed) जानकारी यहां दी गई है। यह कदम जमीन विवादों को खत्म करने और राजस्व विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया जा रहा है।

  1. समस्या क्या थी? (लेखपाल-कानूनगो का ‘खेल’)
    अभी तक जमीन की नाप-जोख के लिए ‘जरीब’ (लोहे की जंजीर) या फीते का इस्तेमाल होता था। यह तरीका पूरी तरह मानवीय (manual) था। इसमें अक्सर निम्नलिखित शिकायतें आती थीं:
  • पक्षपात: आरोप लगते थे कि लेखपाल या कानूनगो किसी एक पक्ष के प्रभाव में आकर गलत नाप कर देते हैं।
  • देरी: “सिहद्दा” (फिक्स प्वाइंट या पक्का निशान) न मिलने का बहाना बनाकर पैमाइश टाल दी जाती थी।
  • विवाद: एक बार नापने के बाद दूसरा पक्ष उसे चुनौती देता था, जिससे विवाद सालों तक चलता रहता था।
  1. समाधान: जीपीएस आधारित ‘रोवर’ (Rover) तकनीक
    इस ‘खेल’ को खत्म करने के लिए योगी सरकार 350 रोवर मशीनें खरीद रही है। यह एक हाई-टेक डिवाइस है।
  • कैसे काम करता है: यह मशीन सैटेलाइट (उपग्रह) से जुड़ी होती है और ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ के डेटा का उपयोग करती है।
  • फिक्स प्वाइंट की जरूरत नहीं: पहले पैमाइश शुरू करने के लिए गांव में कोई पक्का निशान (जैसे कुआं, बरगद का पेड़ या पुराना खंभा) ढूंढना पड़ता था। रोवर मशीन को इसकी जरूरत नहीं है; यह सैटेलाइट से अपनी लोकेशन खुद तय करती है।
  1. सटीकता और गति (Accuracy & Speed)
  • मात्र 5-10 मिनट: जिस पैमाइश में पहले घंटों या पूरा दिन लगता था, रोवर मशीन उसे केवल 5 से 10 मिनट में पूरा कर देगी।
  • सटीकता: राजस्व परिषद के अध्यक्ष के अनुसार, इसमें 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता (accuracy) होगी। यानी गलती की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
  • डिजिटल नक्शा: यह मशीन न केवल नापेगी, बल्कि मौके पर ही जमीन का सटीक नक्शा भी तैयार कर देगी।
  1. प्रशासनिक तैयारी और टीम का गठन
    सरकार ने इसे लागू करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है:
  • मशीन की कीमत: एक रोवर की कीमत लगभग 6 से 7 लाख रुपये है।
  • विशेष टीम: हर तहसील में इस मशीन को चलाने के लिए एक टीम होगी। इसमें शामिल होंगे:
  • एक नायब तहसीलदार (टीम लीडर)
  • दो कानूनगो (राजस्व निरीक्षक)
  • दो लेखपाल
  • SOP (नियमावली): राजस्व परिषद इसके उपयोग के लिए एक ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) बना रहा है ताकि कोई भी अधिकारी मनमानी न कर सके।
  1. आम जनता को क्या फायदा होगा?
  • विवादों का निपटारा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व वादों के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। इस मशीन से नाप होने पर कोई पक्ष बेईमानी का आरोप नहीं लगा पाएगा, जिससे मुकदमेबाजी कम होगी।
  • भ्रष्टाचार पर लगाम: मशीन से निकलने वाला डेटा डिजिटल होगा, जिसे बदला नहीं जा सकता। इससे घूसखोरी और मैन्युपुलेशन पर रोक लगेगी।
    कब से लागू होगा?
    इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट (ट्रायल) कई गांवों में सफल हो चुका है। खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है और नए साल (2025-26) की शुरुआत में ही इसे प्रदेश की सभी तहसीलों में लागू कर दिया जाएगा।

पैमाईश की नई प्रक्रिया

नई तकनीक (रोवर मशीन) के आने के बाद जमीन की पैमाइश (नाप) की पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी। अब यह प्रक्रिया ज्यादा हाई-टेक और पारदर्शी होगी।

यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step) समझिए कि अब नई व्यवस्था में नाप कैसे होगी:

चरण 1: आवेदन (Application)सबसे पहले किसान या जमीन मालिक को धारा 24 (सीमांकन) के तहत उप-जिलाधिकारी (SDM) या तहसीलदार के यहां आवेदन करना होगा। यह प्रक्रिया ऑनलाइन (IGRS या e-District पोर्टल) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से हो सकती है। आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।

चरण 2: टीम का गठन और नोटिसआवेदन स्वीकार होने के बाद, तहसीलदार नई व्यवस्था के तहत विशेष टीम को जिम्मा सौंपेंगे।

इस टीम में 1 नायब तहसीलदार, 2 कानूनगो और 2 लेखपाल होंगे।

पैमाइश की एक तारीख तय की जाएगी और पड़ोसी किसानों (चौहद्दीदारों) को नोटिस भेजा जाएगा ताकि वे मौके पर मौजूद रहें।

चरण 3: मौके पर टीम का पहुंचना (Rover के साथ)तय तारीख पर टीम ‘रोवर मशीन’ (Rover Machine) लेकर खेत पर पहुंचेगी।

पुराना तरीका: पहले टीम को खेत नापने से पहले गांव का कोई पक्का निशान (कुआं, पुराना पेड़ या सीहद्दा) ढूंढना पड़ता था, जिसमें बहुत समय लगता था।

नया तरीका: रोवर मशीन को ऐसी किसी निशान की जरूरत नहीं है। इसे खेत में ले जाकर ऑन (On) किया जाएगा।

चरण 4: मशीन का सेटअप और सैटेलाइट कनेक्शनरोवर मशीन ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ (Survey of India) के सर्वर और सैटेलाइट से कनेक्ट होगी।

यह मशीन जीपीएस (GPS) सिग्नल के जरिए अपनी सटीक लोकेशन (Latitude/Longitude) पता कर लेती है।

यह मशीन डिजिटल नक्शे (Digital Map) को लोड करेगी जो राजस्व विभाग के सर्वर पर पहले से मौजूद है।

चरण 5: पैमाइश (Actual Measurement)

अब लेखपाल रोवर मशीन (जो एक छड़ी/पोल जैसी दिखती है जिसके ऊपर डिवाइस लगा होता है) को लेकर खेत के चारों कोनों (Medh) पर जाएंगे।

लेखपाल मशीन को खेत के एक कोने पर रखेंगे।

मशीन 5-10 सेकंड में उस कोने के सटीक ‘कोर्डिनेट’ (Coordinates) रिकॉर्ड कर लेगी।

इसी तरह चारों कोनों या मुड़ान बिंदुओं (Turning points) पर मशीन रखी जाएगी।

चरण 6: परिणाम और नक्शा (Result)

चारों कोनों की रीडिंग लेने के बाद, मशीन अपने सॉफ्टवेयर में गणना (Calculation) करेगी।

तुरंत रिजल्ट: मशीन तुरंत बता देगी कि नक्शे के हिसाब से आपकी मेड (plot Boundary) कहां होनी चाहिए और वर्तमान में वह कहां है। तथा आपका खेत किस खेत में कितने मीटर घुसा हुआ है।

यह मशीन 5 सेंटीमीटर तक की बारीकी पकड़ लेगी, यानी अगर पड़ोसी ने 2 इंच जमीन भी दबाई है, तो मशीन बता देगी।

चरण 7: पत्थर गड़ी और रिपोर्टमशीन द्वारा बताई गई सही जगह पर निशान (पत्थर या खूंटा) गाड़ दिए जाएंगे।

टीम मौके पर ही ‘फील्ड बुक’ या मेमो तैयार करेगी।

चूंकि यह डेटा डिजिटल मशीन से आया है, इसलिए बाद में कोई इसे आसानी से चुनौती नहीं दे पाएगा (क्योंकि इसमें मानवीय गलती/Human Error की गुंजाइश नहीं है)।

अंत में तहसीलदार इस रिपोर्ट को फाइनल मंजूरी देंगे और केस बंद (case Nistarit) हो जाएगा।

निष्कर्ष:इस पूरी प्रक्रिया में लेखपाल अब घंटों धूप में फीता या जंजीर लेकर दौड़ने की जरूरत नहीं होगी। सब कुछ डिजिटल डेटा और सैटेलाइट के जरिए 10 से 15 मिनट में पूरा हो जाएगा।

Leave a Comment