सावधान! 15 अप्रैल 2026 से पहले बनवा लें अपनी ‘किसान आईडी’, वरना रुक सकती है पीएम-किसान की किस्त!
वर्ष 2026 में ‘किसान रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) केवल एक डेटाबेस नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए एक अनिवार्य “डिजिटल पासपोर्ट” बन गई है।
- मिशन का लक्ष्य (Target 2026)
- भारत सरकार ने 2026-27 तक देश के 11 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी बनाने का लक्ष्य रखा है।
- उत्तर प्रदेश अपडेट: योगी सरकार ने 15 अप्रैल 2026 तक राज्य के सभी 2.88 करोड़ किसानों (विशेषकर पीएम-किसान लाभार्थियों) की रजिस्ट्री पूरी करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में सबसे आगे चल रहा है।
- किसान रजिस्ट्री क्या है? (तकनीकी पहलू)
यह ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) का मुख्य हिस्सा है, जिसमें तीन चीजों का मिलान होता है:
- किसान की पहचान: आधार के माध्यम से (e-KYC)।
- जमीन की पहचान: खतौनी (Land Records) के माध्यम से।
- फसल की पहचान: डिजिटल क्रॉप सर्वे (E-Padtal) के माध्यम से।
- 2026 में इसके बिना क्या रुक सकता है?
- पीएम-किसान 22वीं किस्त: फरवरी/मार्च 2026 में आने वाली किस्त के लिए अब ‘यूनिक फार्मर आईडी’ अनिवार्य की जा सकती है।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): अब केवल वही किसान अपनी उपज मंडी में बेच पाएंगे जिनका डेटा किसान रजिस्ट्री में दर्ज होगा।
- खाद सब्सिडी: भविष्य में यूरिया और डीएपी पर मिलने वाली सब्सिडी भी सीधे इस आईडी से जुड़ी होगी।
- पंजीकरण की प्रक्रिया (2026 Update)
किसान इन तीन तरीकों से अपनी आईडी बनवा सकते हैं:
- स्वयं द्वारा (Self-Registration): आधिकारिक पोर्टल upfr.agristack.gov.in पर जाकर आधार ओटीपी के जरिए।
- लेखपाल/सर्वेयर के माध्यम से: आपके जैसे राजस्व अधिकारी गांव-गांव जाकर ई-पड़ताल (Digital Crop Survey) के दौरान डेटा सत्यापित कर रहे हैं।
- जनसेवा केंद्र (CSC): किसान अपने नजदीकी CSC पर जाकर मामूली शुल्क (₹20-50) देकर पंजीकरण करा सकते हैं।
- आवश्यक दस्तावेज (Checklist)
- आधार कार्ड: (मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य)।
- खतौनी (Land Records): जमीन का विवरण।
- बैंक पासबुक: (आधार सीडेड बैंक खाता)।
- फोटो: पासपोर्ट साइज (डिजिटल अपलोड के लिए)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या ‘यूनिक फार्मर आईडी’ बनवाना अनिवार्य है?
उत्तर: जी हाँ, भविष्य में पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और खाद पर मिलने वाली सब्सिडी जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ जारी रखने के लिए यह आईडी अनिवार्य की जा सकती है। 2026 तक सभी सक्रिय किसानों को इस डिजिटल पहचान से जोड़ने का लक्ष्य है।
प्रश्न 2: मेरी जमीन मेरे पिता के नाम है, क्या मेरी भी आईडी बनेगी?
उत्तर: यूनिक फार्मर आईडी भू-अभिलेखों (खतौनी) पर आधारित होती है। आईडी उसी व्यक्ति की बनेगी जिसके नाम पर जमीन दर्ज है। यदि आप सह-खातेदार हैं, तो आपके हिस्से के आधार पर आपकी अलग आईडी बन सकती है।
प्रश्न 3: अगर खतौनी और आधार में नाम अलग-अलग है तो क्या होगा?
उत्तर: यह एक आम समस्या है। यदि नाम में मामूली अंतर है, तो बायोमेट्रिक सत्यापन से काम चल सकता है। लेकिन अगर नाम पूरी तरह अलग है, तो आपको अपनी तहसील या जनसेवा केंद्र के माध्यम से खतौनी या आधार में सुधार करवाना होगा, तभी आईडी जनरेट हो पाएगी।
प्रश्न 4: डिजिटल क्रॉप सर्वे (E-Padtal) से मुझे क्या फायदा है?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी फसल का सटीक रिकॉर्ड सरकार के पास होगा। यदि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होती है, तो मुआवजा पाने के लिए आपको भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही, बैंक से लोन (KCC) लेते समय भी यह रिकॉर्ड आपकी मदद करेगा।
प्रश्न 5: क्या निजी सर्वेयर मेरा डेटा सुरक्षित रखेंगे?
उत्तर: डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए अधिकृत निजी सर्वेयर केवल सरकारी ऐप का उपयोग करते हैं। उनका काम केवल डेटा एकत्र करना है, जिसे बाद में लेखपाल और राजस्व विभाग द्वारा सत्यापित (Verify) किया जाता है। आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
प्रश्न 6: मैं अपनी किसान आईडी कैसे देख सकता हूँ?
उत्तर: सरकार द्वारा जल्द ही इसके लिए एक समर्पित पोर्टल और मोबाइल ऐप जारी किया जाएगा। आप अपने आधार नंबर या पीएम-किसान रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए अपनी आईडी का स्टेटस चेक कर पाएंगे।